मेरे भरोसे जोड़ता है
सीमेंट कहता है
चल तेरे टूटे अरमान जोड़ दूं
फिर सोचता हूं
जुड़े अरमानों से भी
मैं उनके कारवां में
कहां शामिल
जैसे तू मेरे मिश्रण से
घर वार बनाता है
कंक्रीट कहता है
चल उसका मूर्त बनाएं
फिर सोचता हूं वो
मूर्त क्या समझेगी
और पत्थर एहसास के
कहां काबिल
जैसे तू मेरे सहारे
उसके सपने गढ़ता है
दिल कहता है
चल उनका दीदार करें
फिर सोचता हूं
वो तो गैर है
और गैरों के दीदार से
क्या हासिल