रविवार, 10 नवंबर 2024

तुम मिल गये

कई सवालों के 
जबाब मिल गये 
मिले तो तुम 
काफी पहले थे वैसे 
आज पहले जैसे 
कवि मिल गये 

तेरे नक्शे-कदम पर चले 
तो क्या बुरा किया 
लफ़्ज़ों के सच्चे 
हमसफ़र मिल गये 
मिले तो खुशी के मौके 
गम के मंज़र 
काफी पहले थे वैसे 
आज कलम के माहिर जैसे 
तुम मेरे मजहबी मिल गये 

रोज कुआं खोद 
प्यास बुझाने बालों को 
अपनी सोहरती 
सूरत से दर्पण मिल गये 
मिले तो चीथड़ों से चीर
काफी पहले थे वैसे 
आज तुम मखमली लिबास जैसे 
ऐसो आराम सभी मिल गये 

चले तो साथ ही थे 
सफर में दोनों 
तुम्हें कौन और 
हमें कैसे मिल गये 
मिल तो रास्ते में कई 
महानुभाव काफी पहले थे वैसे 
आज तुम बुलंदी जैसे 
हुनर में अव्वल करतबी मिल गये 

मेरे भावों के पानी में 
तेरे जज़्बात मिल गये 
मिले तो ख्यालों के पंख 
काफी पहले थे वैसे 
आज तुम मेरे जैसे 
मुझे अजनबी मिल गये 

                                                         अजनबी