बुधवार, 29 मार्च 2023

मतलबी दुनियां

आदर्श बनाया 
नक्शे कदम पर चला 
सारे के सारे वो दोस्त 
मतलबी निकले 


दरबदर भटका 
बिना सींग की भेड़ भी 
वो हिंसक निकली 

ब्रह्म मुहूर्त में 
ध्याया जिसको 
वो मूरत भी 
पत्थर की निकली 

कट्टरता पर अड़ी रही 
वो तरुणाई की पहली 
पसंद भी मजहबी निकली 

होली के मौके पर बेरंग हूं 
खुद ही पोत ले खुद को 
अजनबी दिल से 
यह आवाज निकली 

                                             अजनबी 

शुक्रवार, 24 मार्च 2023

कभी तो मान जाएगा

छोड़ो निराशा 
छोड़ो हताशा 
कैसा मंजर है 
क्या है तमाशा 
दिए जलेंग 
जिस दिन राम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
बरसाना भी मुझ में है 
गोकुल भी मेरे अंदर है 
वह ईश्वर है 
दिल मेरा मंदिर है 
रंगों से खेलूंगा 
जिस दिन श्याम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
शक्ति शूल में है 
खुशबू फूल में है 
रूह की रोशनी 
इश्क के रंग 
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा                                                                                                             अजनबी