बुधवार, 29 मार्च 2023

मतलबी दुनियां

आदर्श बनाया 
नक्शे कदम पर चला 
सारे के सारे वो दोस्त 
मतलबी निकले 


दरबदर भटका 
बिना सींग की भेड़ भी 
वो हिंसक निकली 

ब्रह्म मुहूर्त में 
ध्याया जिसको 
वो मूरत भी 
पत्थर की निकली 

कट्टरता पर अड़ी रही 
वो तरुणाई की पहली 
पसंद भी मजहबी निकली 

होली के मौके पर बेरंग हूं 
खुद ही पोत ले खुद को 
अजनबी दिल से 
यह आवाज निकली 

                                             अजनबी 

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