गुरुवार, 19 जून 2025

"मेरी अधूरी रचना"

**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।

*उसकी सादगी के गांव में,  
हर ग़म मेरा खो जाता है।
सांवली सूरत की रौनक में,  
बुझा बुझा मेरा दिन रौशन हो जाता है।*😊   
*उसकी हँसी के फूलों से,  
महक जाता मेरा लम्हां लम्हां
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।

मिट्टी सी सोंधी खुशबू 
उसके दामन में 
दरियाई गिट्टी की खनक 
उसकी पायल में 
छवि बस गई 
मेरे दिल-चमन में,  
हल्की हल्की बातों की मिश्री 
घुले गई धड़कन में 
धूल सी उड़ती 
रेत सी निखरती 
वो इक दिलकश हसीना 😊
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना। 

                                   अजनबी 





सोमवार, 9 जून 2025

"तेरी यादों के साये....."

गर्म हवाओं में, तेरी यादों के साये 
जून की दोपहरी में मुझ से मिलने आएं 🎶
गर्म हवाओं में, तेरी यादों के साये 
जून की दोपहरी में मुझ से मिलने आएं 🎶

तपती राहों में  
तेरे एहसास की ठंडक मिलती है,
लम्हा लम्हा तेरी याद में  
जिंदगी कुछ तो हसीन लगती है।
तपती राहों में  
तेरे एहसास की ठंडक मिलती है,  
लम्हा लम्हा तेरी याद में  
जिंदगी कुछ तो हसीन लगती है।
तेरी मुस्कराहटों में 
ये जहां इक सपना लगे.. 
तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे।  
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे,  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे। 🌸

इस मौसम को तुम्हें ही 
मानों जान लिया है 
तेरी ही छांव में हैं 
तेरा ही साया इसे मान लिया है
इस मौसम को तुम्हें ही 
मानों जान लिया है 
तेरी ही छांव में हैं 
तेरा ही साया इसे मान लिया है  
धूप सुहानी हर आलम दिवाना लगे 
तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे 
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे। 

जब थक जाए दिल इन राहों में,  
तेरी मुस्कान जैसे बारिश की बूंद।  
हर दर्द को छूकर गुजर जाती है,  
तेरी यादें बन जाएं मीठा सा सुकून।
जब थक जाए दिल इन राहों में,  
तेरी मुस्कान जैसे बारिश की बूंद।  
हर दर्द को छूकर गुजर जाती है,  
तेरी यादें बन जाएं मीठा सा सुकून।


तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे 
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे।