उठा ले फिर गोवर्धन,
पर्वत बन गए गारा,
धँस रही गीली धरा,
क्या करे हिमालय बेचारा।
हे गिरधर...
उठा ले फिर गोवर्धन,
दे हम सबको सहारा।
दुनिया डोले संकट भारी,
नदियाँ उफनें, डूबी धरती सारी,
मेघों ने फैलाया अंधियारा।
हे गिरधर...
उठा ले फिर गोवर्धन,
दे हम सबको सहारा।
भटके मन को राह दिखा दे,
डूबती नैया पार लगा दे,
तेरा ही है नाम सहारा।
हे गिरधर...
उठा ले फिर गोवर्धन,
दे हम सबको सहारा।
अजनबी