गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

"फिर सोचता हूं"

जैसे तू नये दरों दीबार
मेरे भरोसे जोड़ता है
सीमेंट कहता है
चल तेरे टूटे अरमान जोड़ दूं
फिर सोचता हूं
जुड़े अरमानों से भी
मैं उनके कारवां में
कहां शामिल

जैसे तू मेरे मिश्रण से
घर वार बनाता है
कंक्रीट कहता है
चल उसका मूर्त बनाएं
फिर सोचता हूं वो
मूर्त क्या समझेगी
और पत्थर एहसास के
कहां काबिल

जैसे तू मेरे सहारे 
उसके सपने गढ़ता है
दिल कहता है
चल उनका दीदार करें
फिर सोचता हूं
वो तो गैर है
और गैरों के दीदार से
क्या हासिल

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

🌸"मेरे लिए तू "🌸

बटली
थोड़ी कचगिरी 
कसैली
थोड़ी मिश्रीभरी 
बाग है फलों का
भावों के दाम है
आम होगी तू
आम लोगों के लिए
मेरे लिए तो लीची बादाम है 

🌸🌿🌸🌿🌸

कड़वी 
थोड़ी रंग में 
थोड़ी नशीली 
मेरे जहन में 
तन मन डोलती 
कोई बदनाम है
सिकंजवी शरवत होगी तू
सबके लिए
मेरे लिए तो
वोदका व्हिस्की जाम है

🌸🌿🌸🌿🌸

आध्यात्मिक
थोड़ी भौतिक
व्यवहारिक 
थोड़ी अलौकिक
रुह की दौड़ के
आगे विराम है
संसारिक रीत होगी तू
आवाम के लिए
मेरे लिए तो राम ही राम है 

🌸🌿🌸🌿🌸

                                        अजनबी