छोड़ो हताशा
कैसा मंजर है
क्या है तमाशा
दिए जलेंग
जिस दिन राम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
बरसाना भी मुझ में है
गोकुल भी मेरे अंदर है
वह ईश्वर है
दिल मेरा मंदिर है
रंगों से खेलूंगा
जिस दिन श्याम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
शक्ति शूल में है
खुशबू फूल में है
रूह की रोशनी
इश्क के रंग
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा
रूठा है तो क्या
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