शुक्रवार, 24 मार्च 2023

कभी तो मान जाएगा

छोड़ो निराशा 
छोड़ो हताशा 
कैसा मंजर है 
क्या है तमाशा 
दिए जलेंग 
जिस दिन राम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
बरसाना भी मुझ में है 
गोकुल भी मेरे अंदर है 
वह ईश्वर है 
दिल मेरा मंदिर है 
रंगों से खेलूंगा 
जिस दिन श्याम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
शक्ति शूल में है 
खुशबू फूल में है 
रूह की रोशनी 
इश्क के रंग 
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा                                                                                                             अजनबी 

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