शोहरतों के सामान
भूल के आना।
उँगलियों में फँसाए एक पेन,
दो किताबें हाथ में लेकर आना—
अबकी बार आना तो
दो चोटियाँ लहराते आना।
सितारों जड़ी चुनरी,
खनकती चूड़ियाँ
साथ मत लाना।
एहसास का नीला दुपट्टा,
सूच्चे प्रेम सा उजला लिवास
पहन के आना।
अबकी बार आना तो
दो चोटियाँ लहराते आना
मांग का सिंदूर
माथे की बिंदिया
सजा के न लाना।
रात-रंगी कजरारी आँखें,
हल्के गुलाबी रंगे होंठ,
मिट्टी-रंगी अपनी मिट्टी लाना—
अबकी बार आना तो
दो चोटियाँ लहराते आना।
अजनवी
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