शुक्रवार, 15 सितंबर 2023
बुधवार, 29 मार्च 2023
मतलबी दुनियां
आदर्श बनाया
नक्शे कदम पर चला
सारे के सारे वो दोस्त
मतलबी निकले
दरबदर भटका
बिना सींग की भेड़ भी
वो हिंसक निकली
ब्रह्म मुहूर्त में
ध्याया जिसको
वो मूरत भी
पत्थर की निकली
कट्टरता पर अड़ी रही
वो तरुणाई की पहली
पसंद भी मजहबी निकली
होली के मौके पर बेरंग हूं
खुद ही पोत ले खुद को
अजनबी दिल से
यह आवाज निकली
अजनबी
शुक्रवार, 24 मार्च 2023
कभी तो मान जाएगा
छोड़ो निराशा
छोड़ो हताशा
कैसा मंजर है
क्या है तमाशा
दिए जलेंग
जिस दिन राम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
बरसाना भी मुझ में है
गोकुल भी मेरे अंदर है
वह ईश्वर है
दिल मेरा मंदिर है
रंगों से खेलूंगा
जिस दिन श्याम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
शक्ति शूल में है
खुशबू फूल में है
रूह की रोशनी
इश्क के रंग
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा
रूठा है तो क्या
शनिवार, 30 जनवरी 2021
वोट
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
पोस्टर बैनर पोदिंया धमाला
घरे घरे बैठका चलन सियासी चाला
पिय्यकड़ पुछन बोतला ते
तू कुत्थु ते आई गई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
तोड़ मरोड़ जोड़ के सब तंत्र
सियासी चेले कान में फूकें मंत्र
जनहित कोसों दूर
दौड़ सिर्फ कुर्सी लई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
सर्द फिजा च
झुल्ले चुनावी मफलर
फर्जी या मनमर्जी
उनको तो वोट मतलब
भेड चिट्टी हो या काली
हरियाली पर मर गई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
अजनवी
बुधवार, 23 दिसंबर 2020
यह कैसी कशमकश है
सहमी सहमी सी बनी रहती है तुम
प्यार में अपने खोए रहती हो तुम
आँखों में सात समंदर छुपाए रहती हो तुम
न देख कर भी मुझे देखती रहती हो तुम
मेरे सामने आते ही भावविभोर हो जाते हो तुम
मेरे पास आते ही डगमगाने लगता हो तुम हो
आँखों से दिल का हाल बयान करता हो तुम
बिना हिले होठों से अनकहे प्रेम प्रसंग करती हो तुम
दिन रात मेरी प्रेम माला फेरती रहती हो तुम
न देखे मुझे तो बेचैन हो जाओ तुम हो
अजनबी
गुरुवार, 1 नवंबर 2018
पारले ग्रां दा मुण्डू
पारले ग्रां मुण्डू
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
व्यागा उठी पाणियों मैं जादी
मारी-मारी छवाके मुंह धोंदी
नोई कने मुंह धोए मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा -मिठा वोलै मिजो कने

वणी-ठणी कने पढ़ना जादी
वत्ता खड़ोई सहेलियां नयाघदी
भानेयां लाई लाई गलां करै मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
जाणी-जाणी वखे च मैं लगदी
नखरेयां करी-करी चलदी
दिलें-दिलें सह प्यार करै मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
अजनवी
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
व्यागा उठी पाणियों मैं जादी
मारी-मारी छवाके मुंह धोंदी
नोई कने मुंह धोए मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा -मिठा वोलै मिजो कने
वणी-ठणी कने पढ़ना जादी
वत्ता खड़ोई सहेलियां नयाघदी
भानेयां लाई लाई गलां करै मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
जाणी-जाणी वखे च मैं लगदी
नखरेयां करी-करी चलदी
दिलें-दिलें सह प्यार करै मिजो कने
पारले ग्रां दा मुण्डू
मिठा-मिठा वोलै मिजो कने
अजनवी
गुरुवार, 13 सितंबर 2018
वो रोए बहुत.....
विशेष सूचना:- यह रचना खास हैऔर खास दोस्त को समर्पित है उसके जीवन से कुछ पलों को चुराकर इसको रचा गया है...
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद.
दिल बेचैन रहा
इक पल न चैन रहा
हर पल इंतजार रहा
वो देखता बार-बार रहा
वो पहुंचे देर से इंतजार के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद
दिल शिकवा करते रहे
मिल कर भी न मिलने से मरते रहे
रिश्तो की भीड़ में अकेले डरते रहे
बेबसी में आहें भरते रहे
वो चुप रहे मिलने के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद

उस को बैठा के अंदर गली में फिरता रहा
आते जाते साहिबा-साहिबा बुलाता रहा
वो परेशान रहे बहुत मुलाकात के बाद
बो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद.
अजनवी
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद.
दिल बेचैन रहा
इक पल न चैन रहा
हर पल इंतजार रहा
वो देखता बार-बार रहा
वो पहुंचे देर से इंतजार के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद
दिल शिकवा करते रहे
मिल कर भी न मिलने से मरते रहे
रिश्तो की भीड़ में अकेले डरते रहे
बेबसी में आहें भरते रहे
वो चुप रहे मिलने के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद
उस को बैठा के अंदर गली में फिरता रहा
जज्बातों का वादल बूंद-बूंद आंखों से गिरता रहा
अकेले बोर न हों औरों को बैठाता रहा आते जाते साहिबा-साहिबा बुलाता रहा
वो परेशान रहे बहुत मुलाकात के बाद
बो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद.
अजनवी
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