सहमी सहमी सी बनी रहती है तुम
प्यार में अपने खोए रहती हो तुम
आँखों में सात समंदर छुपाए रहती हो तुम
न देख कर भी मुझे देखती रहती हो तुम
मेरे सामने आते ही भावविभोर हो जाते हो तुम
मेरे पास आते ही डगमगाने लगता हो तुम हो
आँखों से दिल का हाल बयान करता हो तुम
बिना हिले होठों से अनकहे प्रेम प्रसंग करती हो तुम
दिन रात मेरी प्रेम माला फेरती रहती हो तुम
न देखे मुझे तो बेचैन हो जाओ तुम हो
अजनबी
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