तेरे संग भर रहा हूं
फीके पड़ गये जो लफ्ज़
तेरे मेरे नाम दर्ज
उनमें उमंग भर रहा हूं
हुई न कभी जो बातचीत
तेरे मेरे बीच
कुछ अनकहे प्रसंग भर रहा हूं
रंग भर रहा हूं
तेरे संग भर रहा हूं
जमीन से बंधी डोर है
हुनर वाज परिंदे चारों ओर है
आसमान पाने की चाह में
इन हवाओं से जंग लड़ रहा हूं
ख्वाबों के आसमान में
तेरी तलाश में
कच्ची डोर से बंधा
मैं पतंग बन रहा हूं
रंग भर रहा हूं
तेरे संग भर रहा हूं
दूरियों के जो दरमियां
तेरी मेरी हैं खामोशियां
उनमें मीठी तरंग भर रहा हूं
रह गई तेरी बाहों की
गुल्फों से जो कुछ नज़ाकतें
रह गई तेरी जुल्फों से
जो कुछ शरारतें
उस मस्ती में भंग भर रहा हूं
रंग भर रहा हूं
तेरे संग भर रहा हूं
अजनबी