मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

"...वो ...पागल"

भूख से त्रस्त पशु 
जैसे हरियाली देखता है 
ऐसे देखता रहा 
.वो ...पागल
डोलता हरा लिवास 
जैसे मैं तुम्हें देखता हूं


प्यास से बेहाल पंछी 
जैसे दरिया देखता है 
ऐसे देखता रहा 
...वो ...पागल 
झिलमिलाता दृश्य 
जैसे मैं तुम्हें देखता हूं 


विरह से व्यथित प्रेमी 
जैसे प्रेयसी देखता है 
ऐसे देखता रहा 
...वो... पागल 
उस शख्सियत को 
जैसे मैं तुम्हें देखता हूं 
 

                                      अजनबी 

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