हो ...हो... हा ..हा ..पन्ने
पन्ने फड़फड़ाएं मेंढ़ों पर
मेंढ़ों पर ....
मैं शायरी लिखूं .....
मैं शायरी लिखूं
गद्दण पर भेड़ों पर
अक्सर अक्षर ....अक्षर
उड़ें फिजाओं में ...
फिजाओं में
मैं तुम्हें महसूस करुं
महसूस करुं,
करुं, हवाओं में
गुज़रे लम्हों का
कहां वो नजारा मिले
गुज़रे लम्हों का
कहां वो नजारा मिले
तुम दो चोटियां करके आओ
और मैं वस्ता लेके तेरे पीछे चलूं
तुम दो चोटियां करके आओ
और मैं वस्ता लेके तेरे पीछे चलूं
शायद इस शायद पर फूल दोबारा खिलें
शायद इस शायद पर फूल दोबारा खिलें
फूल दोबारा खिलें.....
ऊंचे पहाड़ से
अपना गांव घर देखूं
अपना गांव घर देखूं
दूर बड़ी दूर .....
दूर, धुंधली सी
तेरी झलक देखूं
तेरी झलक देखूं
बरसात हो
झकरने गिरें फुहारें गिरे
फुहारें गिरे...
उफान पर हो इश्क ए दरिया
इश्क़ ए दरिया
दोनो किनारे पागल निरे ....
दोनों पागल निरे
बीते जमाने उम्र बीती
बीती उम्र
आज भी लगते बही सिलसिले
बही सिलसिले....
तुम बरसात में भीगती चलो
और मैं तुम्हें गिरते गिरते बचा लूं
तुम बरसात में भीगती चलो
और मैं तुम्हें गिरते गिरते बचा लूं
शायद इस शायद पर भूले दोबारा मिलें
शायद इस शायद पर भूले दोबारा मिलें
भूले दोबारा मिलें....
किनारे से गहरा पानी निहारुं
किनारे से गहरा पानी निहारुं
सदाओं में...
सदाओं में तुम्हें पुकारुं
हो...
सदाओं में तुम्हें पुकारुं
हवाओं में तेरी चुनरी उड़ती आए
हवाओं में तेरी चुनरी उड़ती आए
तेरी चुनरी उड़ती आए
झूम के बाहों में भर लूं
....हो... झूम के बाहों में भर लूं
तू मुझसे मिलने आऐ
जब तू मुझसे मिलने आए
बेशक ए इश्क़
बेशक ए इश्क़ तू जालिम है
तू जालिम है
पर नहीं हैं तुमसे कोई गिले
नहीं तुम से कोई गिले
तुम आज से ...
तुम आज से ..तुम आज से थोड़ा पीछे चलो
थोड़ा पीछे चलो
और मैं जरा कल में जी लूं
और मैं जरा कल में जी लूं
कल में जी लूं
शायद इस शायद पर हम दोबारा मिलें
शायद इस शायद पर हम दोबारा मिलें
हम दोबारा मिलें....
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