**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,
कंटिली झाड़ियों में
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।
ओस भरी आंखों वाली
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।
*उसकी सादगी के गांव में,
हर ग़म मेरा खो जाता है।
सांवली सूरत की रौनक में,
बुझा बुझा मेरा दिन रौशन हो जाता है।*😊
*उसकी हँसी के फूलों से,
महक जाता मेरा लम्हां लम्हां
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,
कंटिली झाड़ियों में
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।
ओस भरी आंखों वाली
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।
मिट्टी सी सोंधी खुशबू
उसके दामन में
दरियाई गिट्टी की खनक
उसकी पायल में
छवि बस गई
मेरे दिल-चमन में,
हल्की हल्की बातों की मिश्री
घुले गई धड़कन में
धूल सी उड़ती
रेत सी निखरती
वो इक दिलकश हसीना 😊
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,
कंटिली झाड़ियों में
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।
ओस भरी आंखों वाली
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।
अजनबी