शुक्रवार, 24 मार्च 2023

कभी तो मान जाएगा

छोड़ो निराशा 
छोड़ो हताशा 
कैसा मंजर है 
क्या है तमाशा 
दिए जलेंग 
जिस दिन राम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
बरसाना भी मुझ में है 
गोकुल भी मेरे अंदर है 
वह ईश्वर है 
दिल मेरा मंदिर है 
रंगों से खेलूंगा 
जिस दिन श्याम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा 
शक्ति शूल में है 
खुशबू फूल में है 
रूह की रोशनी 
इश्क के रंग 
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा 
रूठा है तो क्या 
कभी तो मान जाएगा                                                                                                             अजनबी 

शनिवार, 30 जनवरी 2021

वोट

पंज साल होंदे आसवासन संबोधन 
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई 
इक नी दो नी बणाई बणाई 
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई 


पोस्टर बैनर पोदिंया धमाला 
घरे घरे बैठका चलन सियासी चाला 
पिय्यकड़ पुछन बोतला ते 
तू कुत्थु ते आई गई 
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन 
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई 
इक नी दो नी बणाई बणाई 
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई 

तोड़ मरोड़ जोड़ के सब तंत्र 
सियासी चेले कान में फूकें मंत्र 
जनहित कोसों दूर 
दौड़ सिर्फ कुर्सी लई 
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन 
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई 
इक नी दो नी बणाई बणाई 
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई 

सर्द फिजा च  
झुल्ले चुनावी मफलर
फर्जी या मनमर्जी 
उनको तो वोट मतलब 
भेड चिट्टी हो या काली 
हरियाली पर मर गई 
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन 
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई 
इक नी दो नी बणाई बणाई 
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई 

                                                        अजनवी

बुधवार, 23 दिसंबर 2020

यह कैसी कशमकश है

सहमी सहमी सी बनी रहती है तुम

प्यार में अपने खोए रहती हो तुम

आँखों में सात समंदर छुपाए रहती हो तुम

न देख कर भी मुझे देखती रहती हो तुम

मेरे सामने आते ही भावविभोर हो जाते हो तुम 

मेरे पास आते ही डगमगाने लगता हो तुम हो

आँखों से दिल का हाल बयान करता हो तुम 

बिना हिले होठों से अनकहे प्रेम प्रसंग करती हो तुम 

दिन रात मेरी प्रेम माला फेरती रहती हो तुम 

न देखे मुझे तो बेचैन हो जाओ तुम हो 


                                                      अजनबी

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

पारले ग्रां दा मुण्डू

           पारले ग्रां मुण्डू
           मिठा-मिठा वोलै मिजो कने  



व्यागा उठी पाणियों मैं जादी
मारी-मारी छवाके मुंह धोंदी
नोई कने मुंह धोए मिजो कने
            पारले ग्रां दा मुण्डू
            मिठा -मिठा वोलै मिजो कने



वणी-ठणी कने पढ़ना जादी
वत्ता खड़ोई सहेलियां नयाघदी
भानेयां लाई लाई गलां करै मिजो कने
               पारले ग्रां दा मुण्डू
               मिठा-मिठा वोलै मिजो कने 



जाणी-जाणी वखे च मैं लगदी
नखरेयां करी-करी चलदी
दिलें-दिलें सह प्यार करै मिजो कने
              पारले ग्रां दा मुण्डू
              मिठा-मिठा वोलै मिजो कने

                                                     अजनवी


गुरुवार, 13 सितंबर 2018

वो रोए बहुत.....

विशेष सूचना:-  यह रचना खास हैऔर खास दोस्त को समर्पित है उसके जीवन से कुछ पलों को चुराकर इसको रचा गया है...

वो उसके घर आए इक जमाने के बाद 
वो रोए बहुत आने के बाद.


दिल बेचैन रहा
इक पल न चैन रहा
हर पल इंतजार रहा
वो देखता बार-बार रहा
वो पहुंचे देर से इंतजार के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद 


दिल शिकवा करते रहे
मिल कर भी न मिलने से मरते रहे
रिश्तो की भीड़ में अकेले डरते रहे
बेबसी में आहें भरते रहे
वो चुप रहे मिलने के बाद
वो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद


उस को बैठा के अंदर गली में फिरता रहा
जज्बातों का वादल बूंद-बूंद आंखों से गिरता रहा
अकेले बोर न हों औरों को बैठाता रहा
आते जाते साहिबा-साहिबा बुलाता रहा
वो परेशान रहे बहुत मुलाकात के बाद
बो उसके घर आए इक जमाने के बाद
वो रोए बहुत आने के बाद.
                   
                                                        अजनवी

बुधवार, 5 सितंबर 2018

सोचां विच लव्वया......

सोचां विच लव्वया.
ख्यालां विच लव्वया.
असी तेनूं दिल दे
सवालां विच लव्वया.
गुलावां वांगो कतावां
विच सुकणा ही फव्वया.



तन्हाइयां दे उजाड़
विच सानो डर लगदा ए.
तेरे वाजों साडा नहियों सरदा ए.
गमा विच डुवयां असी तेनूं 
महखानेयां दे शरावां विच लव्वया.
सोचां विच ख्यालां विच लव्वया.
असी तेनूं दिल दे सवाला विच लव्वया ...................


तेरिया यादां मेरे
नाल जंग लड़दियां ने.
यारा नाल मौजा
वेरंग लगदियां ने.
दिल नू वहलाण दे लेई असी तेनूं
महफिलां दे शवावां विच लव्वया.
सोचां विच ख्यालां विच लव्वया.
असी तेनूं दिल दे सवालां विच लव्वया ....................


तर न सके डुवणा
साडा नसीव वण गया.
एदां दा शैलाव आया
सब कुज हड़ गया.
जांदी वरी असी तेंनू हजुयां दे
खारे तलावां विच लव्वया.
सोचां विच ख्यालां विच लव्वया.
असी तेनूं दिल दे सवालां विच लव्वया ...................
       
                                                    अजनवी

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

वदली वो लै तें रस्ते...

वदली वो लै तें रस्ते-राहा.
मवारक तिजो गैरा दियां वुकलां-वाहां.


वत्ता-संदा संगदी-शर्मादी'
भोले जे दिले जो थी भरमादी.
वसाया वो तिजो असा ओंदे-जांदे साहां.
वदली वो लै तें रस्ते-राहां.
मवारक तिजो गैरा दियां वुकलां-वाहां.



असां दे दिलें नदिया साई वहदिए.
हुण लोकां कने रहदिए.
असां दे पल्लें रही वो गइयां आहां.
वदली वो लै तें रस्ते-राहां.
मवारक तिजो गैरां दियां वुकलां-वाहां.

तोड़ी सटियां ते प्यारा दियां डोरा.
चली गई दूर तू असां लांदे रहे दौड़ा.
असां दी करी वो दिति धूड.-स्वाहा.
वदली वो लै तें रस्ते- राहां.
मवारक तिजो गैरां दियां वुकलां- वाहां.
    
                                                        अजनवी