मंगलवार, 19 नवंबर 2024
रविवार, 10 नवंबर 2024
तुम मिल गये
कई सवालों के
जबाब मिल गये
मिले तो तुम
काफी पहले थे वैसे
आज पहले जैसे
तेरे नक्शे-कदम पर चले
तो क्या बुरा किया
लफ़्ज़ों के सच्चे
हमसफ़र मिल गये
मिले तो खुशी के मौके
गम के मंज़र
काफी पहले थे वैसे
आज कलम के माहिर जैसे
रोज कुआं खोद
प्यास बुझाने बालों को
अपनी सोहरती
सूरत से दर्पण मिल गये
मिले तो चीथड़ों से चीर
काफी पहले थे वैसे
आज तुम मखमली लिबास जैसे
चले तो साथ ही थे
सफर में दोनों
तुम्हें कौन और
हमें कैसे मिल गये
मिल तो रास्ते में कई
महानुभाव काफी पहले थे वैसे
आज तुम बुलंदी जैसे
मेरे भावों के पानी में
तेरे जज़्बात मिल गये
मिले तो ख्यालों के पंख
काफी पहले थे वैसे
आज तुम मेरे जैसे
मुझे अजनबी मिल गये
अजनबी
सोमवार, 26 अगस्त 2024
धड़कनों में बसती है
उपकरण को हिदायत
अवरोधक विकल्प का समाहन
जुदा नहीं कर पाएगा
तू यहां .......
तू यहां दिल में हंसती हैं
फेसबुक मैसेंजर तो
हाल फिलहाल की बातें
सदियों से तू यहां.....
तू यहां धड़कनों में बसती है
कठोर है तू बाहर से
नारियल पानी भरी गरी है
इश्क है तुमसे
तुम्हारे गुस्से से इश्क है
लख ज़लालतें दे मुझे
मेरे लिए तू खरी है
उम्र का तकाजा नहीं
यहां फासले भी
मायने नहीं रखते
दूर ढलती शाम
मनमोहक लगती है
चालीस से ऊपर होगी
सब के लिए
मेरे लिए तू सोलह की
सम्मोहक लगती है
अजनबी
शुक्रवार, 15 सितंबर 2023
बुधवार, 29 मार्च 2023
मतलबी दुनियां
आदर्श बनाया
नक्शे कदम पर चला
सारे के सारे वो दोस्त
मतलबी निकले
दरबदर भटका
बिना सींग की भेड़ भी
वो हिंसक निकली
ब्रह्म मुहूर्त में
ध्याया जिसको
वो मूरत भी
पत्थर की निकली
कट्टरता पर अड़ी रही
वो तरुणाई की पहली
पसंद भी मजहबी निकली
होली के मौके पर बेरंग हूं
खुद ही पोत ले खुद को
अजनबी दिल से
यह आवाज निकली
अजनबी
शुक्रवार, 24 मार्च 2023
कभी तो मान जाएगा
छोड़ो निराशा
छोड़ो हताशा
कैसा मंजर है
क्या है तमाशा
दिए जलेंग
जिस दिन राम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
बरसाना भी मुझ में है
गोकुल भी मेरे अंदर है
वह ईश्वर है
दिल मेरा मंदिर है
रंगों से खेलूंगा
जिस दिन श्याम आएगा
रूठा है तो क्या
कभी तो मान जाएगा
शक्ति शूल में है
खुशबू फूल में है
रूह की रोशनी
इश्क के रंग
दोनों मुझ में इल्जाम आएगा
रूठा है तो क्या
शनिवार, 30 जनवरी 2021
वोट
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
पोस्टर बैनर पोदिंया धमाला
घरे घरे बैठका चलन सियासी चाला
पिय्यकड़ पुछन बोतला ते
तू कुत्थु ते आई गई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
तोड़ मरोड़ जोड़ के सब तंत्र
सियासी चेले कान में फूकें मंत्र
जनहित कोसों दूर
दौड़ सिर्फ कुर्सी लई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
सर्द फिजा च
झुल्ले चुनावी मफलर
फर्जी या मनमर्जी
उनको तो वोट मतलब
भेड चिट्टी हो या काली
हरियाली पर मर गई
पंज साल होंदे आसवासन संबोधन
अज्ज अजनवी दरें होंदियां सलामा भई
इक नी दो नी बणाई बणाई
टोलियां समाज सेवक घुमदे कई
अजनवी
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