सन्नाटा था दिल में गहरा
उसकी आहट ने जैसे छू लिया सवेरा
उसकी आहट से मेरी
तो दुनियां निखर गई
जब देखा उसे, जितनी
पी थी सारी उतर गई
इश्क ए शराब के आगे
नशा ए शराब कुछ नहीं
एक उतरा एक चढ़ गया
इसमें मेरा लगा कुछ नहीं
मुस्कान जैसे बिजुरिया
घटाएं चांद पर आकर बिखर गई
जब देखा उसे, जितनी
पी थी सारी उतर गई
रोशन हुए मेरे
दरों-दीवार उसके आने से
फिर बेकरार हुआ
ये दिल उसके जाने से
अंधेरे में जुगनू की महफिलें
पल भर में न जाने किधर गई
जब देखा उसे, जितनी
पी थी सारी उतर गई
दिल की तासीर को
आखिर महकदा याद आया
मैंने देखा, उसने देखा मुझे,
हाले दिल सारा साकी को सुनाया
जाते-जाते उसकी
खामोशी में इक बात रह गई
उसकी आहट से मेरी
तो दुनियां निखर गई
जब देखा उसे, जितनी
पी थी सारी उतर गई
अजनबी