सोमवार, 11 अगस्त 2025

"मैं इक खुफिया कलाकार "

दिल के मौसम लिखता रहा,
पर किसी ने न जाना, मेरा संसार।
जिसे पहचान ना पाए यार 
ओ.....मैं इक खुफिया कलाकार


भीड़ में तन्हा, मैं चलता रहा,
लफ़्ज़ों में अपना दिल रखता रहा,
ज़माने को बस शोर था प्यारा,
मैं चुपचाप अपना गीत गाता रहा। 
सुर्खियों में नहीं निकला मैं गीतकार 
जिसमें जज्बात बेशुमार 
ओ.... मैं इक खुफिया कलाकार

मेरी ग़ज़लों में हैं रंग हज़ार,
मेरी कविताएं उसके दिल के द्वार,
पर सबको थी बस जल्दी की हवा,
किसे फुर्सत थी बैठ कर सुने ज़रा। 
अजीज महफिलों से रहा दरकिनार 
जिसके दिल द्वार लफ्ज़ बेशुमार 
...... मैं खुफिया कलाकार 

लोगों की नज़रें, आगे-आगे,
दिल की किताबें, पीछे रह जाएँ,
मैंने जो कहा, वो सुन न सके,
जो महसूस हुआ, वो समझ न सके।
ये जितने बेपरवाह मैं उतना वफ़ादार 
जज्बों का सौदागर ख्वाबों का सरदार 
ओ...... मैं इक खुफिया कलाकार

एक दिन शायद, हवा बदलेगी,
किसी की नज़र मेरी कलम पढ़ लेगी,
फिर मेरा नाम, आसमान छू लेगा,
और मेरा गीत, सबके दिल में गूंजेगा 

रातों में लिखूँ, सुबहों में गाऊँ,
अपनी रूह का राज़, शब्दों में समाऊँ। 
दिल मैं संभाले जज्बात हजार 
तब तक मैं .....खुफिया कलाकार 

                                     अजनबी 


मंगलवार, 29 जुलाई 2025

इश्क ए शराब


सन्नाटा था दिल में गहरा
उसकी आहट ने जैसे छू लिया सवेरा 


उसकी आहट से मेरी 
तो दुनियां निखर गई
जब देखा उसे, जितनी 
पी थी सारी उतर गई  

इश्क ए शराब के आगे 
नशा ए शराब कुछ नहीं 
एक उतरा एक चढ़ गया 
इसमें मेरा लगा कुछ नहीं 
मुस्कान जैसे बिजुरिया 
घटाएं चांद पर आकर बिखर गई
जब देखा उसे, जितनी 
पी थी सारी उतर गई  

रोशन हुए मेरे 
दरों-दीवार उसके आने से  
फिर बेकरार हुआ 
ये दिल उसके जाने से 
अंधेरे में जुगनू की महफिलें 
पल भर में न जाने किधर गई
जब देखा उसे, जितनी 
पी थी सारी उतर गई  


दिल की तासीर को 
आखिर महकदा याद आया  
मैंने देखा, उसने देखा मुझे, 
हाले दिल सारा साकी को सुनाया 
जाते-जाते उसकी 
खामोशी में इक बात रह गई
उसकी आहट से मेरी 
तो दुनियां निखर गई
जब देखा उसे, जितनी 
पी थी सारी उतर गई 

                               अजनबी 

रविवार, 27 जुलाई 2025

"अरमान बहीं"

चलते रहे हम वक़्त की राहों में
तेरे मेरे हिस्से थे कुछ गवाहों में
तू हँसा कहीं, मैं रोया कहीं
फिर भी दिल कहता रहा तू यहीं
शरीर बूढ़े होते हैं, चाहत नहीं
हम भी वहीं, तुम भी वहीं
वक्त बदल गया
मगर अरमान बहीं…"

तस्वीरों में अब भी वही रंग हैं
साँसों में तेरे नाम के संग हैं
तू जो नज़रों से ओझल सही
पर दिल के आईने में तू ही तू रही
"शरीर बूढ़े होते हैं, चाहत नहीं
हम भी वहीं, तुम भी वहीं
वक्त बदल गया
मगर अरमान बहीं…"

कभी चिट्ठियों में, कभी ख़्वाबों में
तेरे बिना अधूरे हर जवाबों में
आज भी धड़कन कहती यही
"वो मोहब्बत अब भी है सही…"
"शरीर बूढ़े होते हैं, चाहत नहीं
हम भी वहीं, तुम भी वहीं
वक्त बदल गया
मगर अरमान बहीं… 

                                                   अजनबी 



शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

" रंग भर रहा हूं "

रंग भर रहा हूं 
तेरे संग भर रहा हूं 

फीके पड़ गये जो लफ्ज़ 
तेरे मेरे नाम दर्ज 
उनमें उमंग भर रहा हूं 
हुई न कभी जो बातचीत 
तेरे मेरे बीच 
कुछ अनकहे प्रसंग भर रहा हूं 
रंग भर रहा हूं 
तेरे संग भर रहा हूं   

जमीन से बंधी डोर है 
हुनर वाज परिंदे चारों ओर है 
आसमान पाने की चाह में 
इन हवाओं से जंग लड़ रहा हूं
ख्वाबों के आसमान में
तेरी तलाश में 
कच्ची डोर से बंधा
मैं पतंग बन रहा हूं 
रंग भर रहा हूं 
तेरे संग भर रहा हूं 

दूरियों के जो दरमियां 
तेरी मेरी हैं खामोशियां 
उनमें मीठी तरंग भर रहा हूं 
रह गई तेरी बाहों की 
गुल्फों से जो कुछ नज़ाकतें 
रह गई तेरी जुल्फों से 
जो कुछ शरारतें 
उस मस्ती में भंग भर रहा हूं
रंग भर रहा हूं 
तेरे संग भर रहा हूं 

                                           अजनबी 

मंगलवार, 15 जुलाई 2025

"वे सजणा "

भरे विराने च तू  मुस्काया,  
किसी डर ने तैनू सहमाया।  
तेरे कोल कोल रहणे नूं 
जी करदा वे सजणा 
हर बरी तू लुकदा छुपदा 
काह्नों तड़फादां 
काह्नों सतांदा वे सजणा 
असां तेरी बेरुखी नाल मर जाणा
मेरी दिल बगिया दा तू सोणा फुल वे सजणा 
तू सोणा फुल वे सजणा 
आजा मेरे कोल हाकिमा 
एह वेला फिर नी मिलणा
एह वेला फिर नी मिलणा

तू बदलां दा उजाला नीर 
असीं चिकड़गारा वे सजणा, 
तेरे पावन ओज नाल 
बस मुक जाणा वे सजणा 
बण के धूल तेरी राह विच 
बिछाणा,  
दिल, जिंद, जान सब हार जाणा।  
तेतों नी जितणा वे सजणा, 
तेतों नी जितणा वे सजणा,   
सोणी सोणी मुस्कान नाल 
निहाल कर आसिमा
एह फुल फिर नी खिलणा
एह फुल फिर नी खिलणा

मेरे ख्वाबां दी तू रौनक 
असां तेरी बेरुखियां दे सोगी वे सजणा 
मेरे ख्वाबां दी तू रौनक
असां तेरी बेरुखियां दे सोगी वे सजणा 
मुल्कां मुल्कां दी तू बंजारन 
असां पहाड़ां दे जोगी वे सजणा 
मुल्कां मुल्कां दी तू बंजारन 
असां पहाड़ां दे जोगी वे सजणा 
तेरी बिरह दे धूणे बिच जल के 
तेरे नाम दा अलख जगाणा वे सजणा 
चाहे तूं मुड़ ना देख जालिमा 
असां सो बार मर के भी 
तेनु ही चाहणा वे सजणा 
चाहे तूं मुड़ ना देख जालिमा 
असां सो बार मर के भी
तेनु ही चाहणा वे सजणा 
तेनु ही चाहणा वे सजणा 

                                           





गुरुवार, 19 जून 2025

"मेरी अधूरी रचना"

**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।

*उसकी सादगी के गांव में,  
हर ग़म मेरा खो जाता है।
सांवली सूरत की रौनक में,  
बुझा बुझा मेरा दिन रौशन हो जाता है।*😊   
*उसकी हँसी के फूलों से,  
महक जाता मेरा लम्हां लम्हां
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना।

मिट्टी सी सोंधी खुशबू 
उसके दामन में 
दरियाई गिट्टी की खनक 
उसकी पायल में 
छवि बस गई 
मेरे दिल-चमन में,  
हल्की हल्की बातों की मिश्री 
घुले गई धड़कन में 
धूल सी उड़ती 
रेत सी निखरती 
वो इक दिलकश हसीना 😊
**सुर्ख लिवास में वो सांवली सी,  
कंटिली झाड़ियों में 
खिला जंगली फूल जैसे लेंटाना।  
ओस भरी आंखों वाली 
वो मटमैली सी नायिका
मेरी अधूरी रचना। 

                                   अजनबी 





सोमवार, 9 जून 2025

"तेरी यादों के साये....."

गर्म हवाओं में, तेरी यादों के साये 
जून की दोपहरी में मुझ से मिलने आएं 🎶
गर्म हवाओं में, तेरी यादों के साये 
जून की दोपहरी में मुझ से मिलने आएं 🎶

तपती राहों में  
तेरे एहसास की ठंडक मिलती है,
लम्हा लम्हा तेरी याद में  
जिंदगी कुछ तो हसीन लगती है।
तपती राहों में  
तेरे एहसास की ठंडक मिलती है,  
लम्हा लम्हा तेरी याद में  
जिंदगी कुछ तो हसीन लगती है।
तेरी मुस्कराहटों में 
ये जहां इक सपना लगे.. 
तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे।  
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे,  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे। 🌸

इस मौसम को तुम्हें ही 
मानों जान लिया है 
तेरी ही छांव में हैं 
तेरा ही साया इसे मान लिया है
इस मौसम को तुम्हें ही 
मानों जान लिया है 
तेरी ही छांव में हैं 
तेरा ही साया इसे मान लिया है  
धूप सुहानी हर आलम दिवाना लगे 
तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे 
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे। 

जब थक जाए दिल इन राहों में,  
तेरी मुस्कान जैसे बारिश की बूंद।  
हर दर्द को छूकर गुजर जाती है,  
तेरी यादें बन जाएं मीठा सा सुकून।
जब थक जाए दिल इन राहों में,  
तेरी मुस्कान जैसे बारिश की बूंद।  
हर दर्द को छूकर गुजर जाती है,  
तेरी यादें बन जाएं मीठा सा सुकून।


तेरी यादों से 
दिल को ठिकाना लगे 
तेरी छांव में 
हर मौसम सुहाना लगे  
गर्मी की दोपहर भी 
अब प्यारी लगे,  
तेरी यादों के साए में 
ये धूप भी न्यारी लगे।