दिल के मौसम लिखता रहा,
पर किसी ने न जाना, मेरा संसार।
जिसे पहचान ना पाए यार
ओ.....मैं इक खुफिया कलाकार
भीड़ में तन्हा, मैं चलता रहा,
लफ़्ज़ों में अपना दिल रखता रहा,
ज़माने को बस शोर था प्यारा,
मैं चुपचाप अपना गीत गाता रहा।
सुर्खियों में नहीं निकला मैं गीतकार
जिसमें जज्बात बेशुमार
ओ.... मैं इक खुफिया कलाकार
मेरी ग़ज़लों में हैं रंग हज़ार,
मेरी कविताएं उसके दिल के द्वार,
पर सबको थी बस जल्दी की हवा,
किसे फुर्सत थी बैठ कर सुने ज़रा।
अजीज महफिलों से रहा दरकिनार
जिसके दिल द्वार लफ्ज़ बेशुमार
ओ...... मैं खुफिया कलाकार
लोगों की नज़रें, आगे-आगे,
दिल की किताबें, पीछे रह जाएँ,
मैंने जो कहा, वो सुन न सके,
जो महसूस हुआ, वो समझ न सके।
ये जितने बेपरवाह मैं उतना वफ़ादार
जज्बों का सौदागर ख्वाबों का सरदार
ओ...... मैं इक खुफिया कलाकार
एक दिन शायद, हवा बदलेगी,
किसी की नज़र मेरी कलम पढ़ लेगी,
फिर मेरा नाम, आसमान छू लेगा,
और मेरा गीत, सबके दिल में गूंजेगा
रातों में लिखूँ, सुबहों में गाऊँ,
अपनी रूह का राज़, शब्दों में समाऊँ।
दिल मैं संभाले जज्बात हजार
तब तक मैं .....खुफिया कलाकार
अजनबी
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