रविवार, 10 नवंबर 2024

तुम मिल गये

कई सवालों के 
जबाब मिल गये 
मिले तो तुम 
काफी पहले थे वैसे 
आज पहले जैसे 
कवि मिल गये 

तेरे नक्शे-कदम पर चले 
तो क्या बुरा किया 
लफ़्ज़ों के सच्चे 
हमसफ़र मिल गये 
मिले तो खुशी के मौके 
गम के मंज़र 
काफी पहले थे वैसे 
आज कलम के माहिर जैसे 
तुम मेरे मजहबी मिल गये 

रोज कुआं खोद 
प्यास बुझाने बालों को 
अपनी सोहरती 
सूरत से दर्पण मिल गये 
मिले तो चीथड़ों से चीर
काफी पहले थे वैसे 
आज तुम मखमली लिबास जैसे 
ऐसो आराम सभी मिल गये 

चले तो साथ ही थे 
सफर में दोनों 
तुम्हें कौन और 
हमें कैसे मिल गये 
मिल तो रास्ते में कई 
महानुभाव काफी पहले थे वैसे 
आज तुम बुलंदी जैसे 
हुनर में अव्वल करतबी मिल गये 

मेरे भावों के पानी में 
तेरे जज़्बात मिल गये 
मिले तो ख्यालों के पंख 
काफी पहले थे वैसे 
आज तुम मेरे जैसे 
मुझे अजनबी मिल गये 

                                                         अजनबी 

सोमवार, 26 अगस्त 2024

धड़कनों में बसती है

उपकरण को हिदायत 
अवरोधक विकल्प का समाहन 
जुदा नहीं कर पाएगा 
तू यहां .......
तू यहां दिल में हंसती हैं 
फेसबुक मैसेंजर तो 
हाल फिलहाल की बातें  
सदियों से तू यहां..... 
तू यहां धड़कनों में बसती है 

कठोर है तू बाहर से 
नारियल पानी भरी गरी है 
इश्क है तुमसे 
तुम्हारे गुस्से से इश्क है 
लख ज़लालतें दे मुझे
मेरे लिए तू खरी है 

उम्र का तकाजा नहीं 
यहां फासले भी 
मायने नहीं रखते 
दूर ढलती शाम 
मनमोहक लगती है 
चालीस से ऊपर होगी 
सब के लिए 
मेरे लिए तू सोलह की 
सम्मोहक लगती है  

                                               अजनबी 

बुधवार, 29 मार्च 2023

मतलबी दुनियां

आदर्श बनाया 
नक्शे कदम पर चला 
सारे के सारे वो दोस्त 
मतलबी निकले 


दरबदर भटका 
बिना सींग की भेड़ भी 
वो हिंसक निकली 

ब्रह्म मुहूर्त में 
ध्याया जिसको 
वो मूरत भी 
पत्थर की निकली 

कट्टरता पर अड़ी रही 
वो तरुणाई की पहली 
पसंद भी मजहबी निकली 

होली के मौके पर बेरंग हूं 
खुद ही पोत ले खुद को 
अजनबी दिल से 
यह आवाज निकली 

                                             अजनबी