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रविवार, 5 अक्टूबर 2025
कितना खूबसूरत चांद
कौन से आसमां से उतर आया,
या मेरी चाहत से खिंचा आया।
धुंधले उजाले में टकटकी लगाए,
देखता मुझे, मैं उसे...
चुप्पियों में गुफ़्तगू सा साया।
देखो तो कितना ख़ूबसूरत चांद
अटका है मेरी दीवार पर,
झूम उठता है यह दिल
उसमें देख तेरी छाया।
अजनबी
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