रविवार, 15 दिसंबर 2024
बुधवार, 27 नवंबर 2024
बुधवार, 20 नवंबर 2024
मंगलवार, 19 नवंबर 2024
रविवार, 10 नवंबर 2024
तुम मिल गये
कई सवालों के
जबाब मिल गये
मिले तो तुम
काफी पहले थे वैसे
आज पहले जैसे
तेरे नक्शे-कदम पर चले
तो क्या बुरा किया
लफ़्ज़ों के सच्चे
हमसफ़र मिल गये
मिले तो खुशी के मौके
गम के मंज़र
काफी पहले थे वैसे
आज कलम के माहिर जैसे
रोज कुआं खोद
प्यास बुझाने बालों को
अपनी सोहरती
सूरत से दर्पण मिल गये
मिले तो चीथड़ों से चीर
काफी पहले थे वैसे
आज तुम मखमली लिबास जैसे
चले तो साथ ही थे
सफर में दोनों
तुम्हें कौन और
हमें कैसे मिल गये
मिल तो रास्ते में कई
महानुभाव काफी पहले थे वैसे
आज तुम बुलंदी जैसे
मेरे भावों के पानी में
तेरे जज़्बात मिल गये
मिले तो ख्यालों के पंख
काफी पहले थे वैसे
आज तुम मेरे जैसे
मुझे अजनबी मिल गये
अजनबी
सोमवार, 26 अगस्त 2024
धड़कनों में बसती है
उपकरण को हिदायत
अवरोधक विकल्प का समाहन
जुदा नहीं कर पाएगा
तू यहां .......
तू यहां दिल में हंसती हैं
फेसबुक मैसेंजर तो
हाल फिलहाल की बातें
सदियों से तू यहां.....
तू यहां धड़कनों में बसती है
कठोर है तू बाहर से
नारियल पानी भरी गरी है
इश्क है तुमसे
तुम्हारे गुस्से से इश्क है
लख ज़लालतें दे मुझे
मेरे लिए तू खरी है
उम्र का तकाजा नहीं
यहां फासले भी
मायने नहीं रखते
दूर ढलती शाम
मनमोहक लगती है
चालीस से ऊपर होगी
सब के लिए
मेरे लिए तू सोलह की
सम्मोहक लगती है
अजनबी
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