तेरी चाहतों से थोड़ी आसान लगे
उड़ता परिंदा हूं
ओझल हो जाऊं
दुनिया की नजरों से
कितना हसीन
ये आसमान लगे
तू हमदर्द
सर्द धुंध सा मेरे अगल-बगल
तेरे सिवा कुछ न दिखे
घुल गया है मेरे वजूद में
खुशबू सा
न महके ऐसा क्या आजमाएं
तुम्हें सोच के न हर्षाए
जो तुम्हें न चाहे
वो दिल कहां से लाएं
दुश्वारियों में गुजर-बसर है
तेरी आहटों से
सोहराते सामान लगे
अजनबी हूं
खो जाऊं अनजानी राहों में
कितना बेगाना ये जहां लगे
तू परछाई सायों सा
मेरे इर्द-गिर्द
तेरे ओज से
उजालों में भी कुछ न दिखे
ज़हन में बसा है जो
अपना बन के गैर है वो
कैसे खुद को समझाएं
मुझे न सताए जो
तुम्हें न चाहे
वो दिल कहां से लाएं
मूक सन्नाटे
कभी जोरों का
कोलाहल है यहां
तेरी मुस्कराहटों से
संगीतमय ये ज़हान लगे
तू आसमानी परी सी
छुपा ले अपने आगोश में
ये दर्द अब अन सहा लगे
धूप रोशनी हवाओं सी
मेरे आस-पास
महसूस हो पर न दिखे
सपनों में आती है
हकीकत में नहीं
भ्रम है असल नहीं
छलावे से कैसे खुद को बचाएं
मुझे न फंसाए
जो तुम्हें न चाहे
वो दिल कहां से लाएं
अजनबी